अभिभावक

पल प्रतिपल बच्चे बढते चले जाते हैं

इस तथ्य को वे नहीं स्वीकार पाते हैं

शायद इसलिये ही, उनके लिये,

बच्चे बड़े नहीं, कपड़े छोटे हो जाते हैं..

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