धुँधला जहाँ

चश्मा मैं उतार कर रख दूँ यहीं, फिर देखूँ ये जहाँ, कि ये जहाँ धुँधला ही सही.. जो हो रहा हो गलत, दिखे मुझे ठीक चाहे हो ऐसा एक पल के लिए ही अभी … कि ये जहाँ धुँधला ही सही… झूठ में ही, देखूँ जब कोई नारी, तो दिखे ऐसी नारी, डर-भय से जो…