KAVI GOPALDAS NEERAJ

कुछ 8-10 साल मम्मी-पापा की शादी की सालगिरह थी। हमलोग ने सोचा कि दोनो की फोटो इकट्ठा करके एक विडियो बनायेंगे। बना भी लिया। अब बस एक गाना चाहिए था जो कि उस विडियो में पीछे चलता रहे। बहुत खोजा। मिल ही नहीं रहा था। बहुत मशक्कत के बाद एक गाना मिला… “फूलों के रंग…

धुँधला जहाँ

चश्मा मैं उतार कर रख दूँ यहीं, फिर देखूँ ये जहाँ, कि ये जहाँ धुँधला ही सही.. जो हो रहा हो गलत, दिखे मुझे ठीक चाहे हो ऐसा एक पल के लिए ही अभी … कि ये जहाँ धुँधला ही सही… झूठ में ही, देखूँ जब कोई नारी, तो दिखे ऐसी नारी, डर-भय से जो…

अभिभावक

पल प्रतिपल बच्चे बढते चले जाते हैं इस तथ्य को वे नहीं स्वीकार पाते हैं शायद इसलिये ही, उनके लिये, बच्चे बड़े नहीं, कपड़े छोटे हो जाते हैं..

वह दिन!

क्या दिन था! तारीख थी 21 जून 2016। तारीख इसलिए याद है क्योंकि संयोग से उस दिन ‘अंतर-राष्ट्रीय योग दिवस’ भी था। पर अगर न भी होता तब भी याद रहता। बात ही ऐसी थी कि याद जिसे रखे मन। मेरा पहला इफ्तार! यह कहते ही, मशहूर शायर, राहत इंदौरी कि एक पंक्ति याद आती…

तो क्या ?!

तो क्या, जब जो चाहा वो मिला नहीं, जियें हैं अब तक, जीयेंगे अब भी। तो क्या, जो राह हो ज़रा मुश्किल, चल रहे हैं अब भी, चलेंगे तब भी।

जाने क्यों ?

जो चाहा वो मिला नहीं, जो पाया उसकी कदर न की । होता है ऐसा क्यों अक्सर, आती किसी की अहमियत समझ उसके खो जाने पर …???

क्या सोचा, क्या हुआ

नींद टूटने के बाद भी नींद आ रही थी । आँखे अपने आप ही बंद हो और खुल रही थीं। डगमगाते पैरों से मैं मम्मी के पास गई। वे ड्राइंग रूम में टी.वी. देख रही थीं ।सोचा टी.वी. देखकर शायद आँखें  खुल जायेंगी। मैं सोफे पर बैठने जा रही थी कि अकस्मात् ही मैं  सेण्टर…

तबीयत

कुछ चीजें वाकई हैरान कर देने वाली होती हैं। यह चीज़ें वक्त- बेवक्त हमारे सामने आ जाती हैं और हमें लाचार बना जाती हैं। ऐसी ही एक चीज़ है- बीमारी! बीमारी के आगे इंसान कितना छोटा है। इसके आगे किसी का अधिकार नहीं चलता। एक बार जब मैं बीमार पड़ी, तब मुझे यह ख्याल आया-…